भारतीय अस्मिता व गौरव का प्रतीक अनुकरणीय  विक्रमी संवत विश्व का का माप दण्ड बना: -सुधीर मुनि

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करनाल: एस. एस ए. जैन संघ के तत्वावधान में तथा युगपुरुष उप प्रवर्तक सुभाष मुनि के मंगल सानिध्य में भारतीय नववर्षं मनाया गया। इस अवसर पर प्रवचन दिवाकर सुधीर मुनि संवत हमारी  भारतीय अस्मिता  का प्रतीक है। ईस्वी सन् से 57 वर्ष पूर्व सत्य व न्याय के पर्याय महाराजा विक्रमादित्य के राज्याभिषेक, पर तत्कालीन जनमानस ने अपने आराध्य, आत्मीय जन वल्लम राजा के नाम पर संवत् चलाकर अपने समर्पण का इजहार किया जो आगे चलकर पाश्चात्य जगत के लिए अनुकरणीय बना। अंग्रेजों ने ईसामसीह के नाम पर ईस्वी सन् चलाकर भारतीयों का अनुकरा किया। अपनी संस्कृति पर सदैव गर्व करो। जैन साध्वी  डा. अर्चना ने कहा ना महाराजा विक्रमादित्य ने अपने बाहुबल से शकों, हूणों व विदेशी आतातायियों को भगाकर अखण्ड भारत का सपना साकार किया। क अद्भुत दानी, तपस्वी, क्षमाशील, न्यायी, प्रा वत्सूल, महापराक्रमी, शूरवीर सम्राट मर्यादा पुरुषोत्तम राम व कर्मयोगी श्री कृष्णा के पश्चात् भारत की जनता ने इन्हें सम्मान व आदर दिया। जैन इतिहास व भारतीयइतिहास इस तथ्य के सभी है कि इनके सत्य के प्रभाव से देव शक्तियां इनके चरणों में नतमस्तक की। भारत के सर्वाधिक वीर पुत्रों में इनका नाम स्वपरि है। सभी धर्मों का आदर व सम्मान करने के बावजूद मे जैनाचार्य श्री सिद्धसैन दिलाकर के प्रिय शिष्य व कृपापात्र थे। इनके राज्य में सर्व लोग शान्ति व पुरक्षा का अनुभव करते थे। राजा विक्रमादित्य के समय भारत होने की चिडिय़ा कहलाता था।न्यू जैन महिला मण्डल की सालों ने विक्रम संवत नववर्ष का भजन गाकर सभी को बधाई दी। जैन सभा की ओर से गौतम प्रसादी का भव्य आयोजन हुआ। महिला मण्डल की ओर ऐ समयानुशासन के पांच पुरस्कार निकाले गए मंच का संचालन महामंत्री कृष्ण जैन ने किया।

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